उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की चल रही बयार

Short info :- महिला सशक्तिकरण के जरिए ही मानवता का सशक्तिकरण संभव है,इस तत्व को भलीभांति स्थापित करने के लिए सर्वप्रथम महिला सशक्तिकरण एवं मानवता को स्पष्ट कर देना उचित रहेगा

क्योंकि दोनों के ही अध्यापक हैं,और सुंदर वैश्विक है,पहले महिला सशक्तिकरण को लेते हैं,महिला सशक्तिकरण से अभिप्राय महिलाओं को पुरुषों के बराबर वैधानिक राजनीतिक शारीरिक

मानसिक सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में उनके परिवार समुदाय समाज एवं राष्ट्र की सांस्कृतिक पक्ष में निर्णय लेने की सुविधाएं महिला सशक्तिकरण के

द्वारा किसी महिला महिलाओं के समूह को इस लायक बनाया जाता है कि वे जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान हो सकती को महसूस कर सकें

अब आते हैं मानवता पर 12th का मूलमंत्र यही है कि सभी मानव समाज हित में लिंग जाति धर्म में भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं सही अर्थों में महानता की कसौटी यही है,

कि यदि किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह में किन्हीं कारणों से कोई गिरावट आती है तो उसे संभालने का दायित्व मानव समाज का है,इस विवेचन से स्पष्ट है कि महिला सशक्तिकरण एवं मानवता शुद्धिकरण के मध्य अनुदेशक का संबंध है

अथवा दोनों एक ही दूसरे पर अवलंबित है यदि महिलाएं सशक्त होंगी तो मानवता भी सशक्त होगी यदि विभिन्न प्रकार के भेदभाव के कारण महिलाएं कमजोर होती है तो मजबूत नहीं होत है

औरतों को सशक्त बनाने के लिए नारी को सशक्त बनाना जाना अत्यंत आवश्यकता है किंतु एक कटु सत्य है कि सदियों से नारी वैश्विक स्तर पर उपेक्षा अपमान भेज दो किसी का रही है

यदि ऐसा न होता तो ना तो महिला सशक्तिकरण की कोई बात उठाते और ना ही महिला दिवस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का पूरा महिलाओं के अधिकारों का हनन किया जाता है,

और मानवता जर्जर होती रहती है समाज पुरुष महिलाओं को पीछे धकेला जाता रहा महिलाओं के प्रति वर्षों से होने वाले भेदभाव पर हम अंकुश ना लगा पाए

अभी कि 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं किंतु आज भी वैसे की तरह महिलाओं से जुड़े परिदृश्य बहुत तसल्ली पक्ष नहीं है फिर चाहे विश्व के विकसित देशों या विकासशील देश वैश्विक

स्तर पर महिला सशक्तिकरण के लिए उनका राजनीतिक स्तर पर सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है कि आंकड़ों से पता चलता है कि अभी भी राजनीतिक स्तर पर आधी आबादी का प्रतिशत आबादी किस तरह

आधी आबादी का प्रतिशत न्यूज़ है आधी आबादी किस तरह राजनीतिक हाशिए पर है इसका पता इसी से चलता है कि अमेरिका जैसे विकसित देश की सरकार में महिला मंत्रियों के प्रतिशत मात्र 14 1093 है,

भारत जैसे विकासशील देश में आपसे चाहता है तो चीन पाकिस्तान ब्राजील पैरों में यह प्रतिशत से अधिक नहीं जाता विश्व स्तर पर महिलाओं से जुड़े कुछ और आखिरी विचार नहीं है,

अभी तक विश्व के मात्र 125 देशों से जिन्होंने अपने यहां घरेलू हिंसा का गैर कानूनी घोषित किया है विश्व के 173 देशों में अनिवार्य रूप से संगठन मातृत्व अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित कर रखी है,

ऐसे हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति में महिलाओं को बराबर का अधिकार दिए जाने का सुनिश्चित कर रखा है,संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि विश्व भर में 60 करोड़ औरतें असुरक्षित किसके रोजगार में है,

जैसे उन्हें पुरुषों से 3% कम वेतन मिलता है वे शिक्षा और प्रशिक्षण से वंचित है विकासशील देशों में 33 पीस दी लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से पहले हो जाता है इसमें अनेक विसंगतियां जन्म लेती हैं,

बाल विवाह प्रथा जारी रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में व्यापक नहीं रख सकता है जिसके कारण वैश्विक विकास में सहभागिता नहीं हो पा रही है इन आंकड़ों से ध्वनित होता है,

कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विभिन्न स्तरों पर आज महिलाएं भेदभाव के शिकार हैं एक समाज जो भी था कि महिलाओं को मताधिकार तक से वंचित रखा जाता था इसीलिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई,

सबसे बड़ी समस्या तो लैंगिक भेदभाव की है जिसका सा महिलाओं को सही करना पड़ता है महिलाओं के साथ भूल जाता है,कि महिलाओं के ऐसा नहीं है,कि प्रगतिशील ता की तरफ बढ़ रहा हमारा समाज विश्व महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए फिक्र मन नहीं है,

हमें मालूम है कि महिलाओं को सशक्त बनाकर ही मानवता को सशक्त बनाया जा सकता है वहां हमारे सामने क्षेत्र में महिलाओं को सम्मानजनक भागीदारी होती है यह सकारात्मक नतीजे सामने आते हैं।

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